भारत मे बिखरते संयुक्त परिवार

आधुनिक युग मे भारतीय समाज मे एकल परिवारों की चाहत होने से धीरे धीरे संयुक्त परिवार की संख्या कम होती जा रही है, यह पहले पश्चिमी देशों में ही एकल परिवारों का चलन देखने को मिलता था पर अब यह भारतीय परिवारों में बहुत ज्यादा देखने को मिलता है इसके क्या कारण है कि यह चलन भारतीय परिवारों में बढ़ा इसका मुख्य कारण यह है कि हर पारिवारिक सदस्य फ्रीडम चाहता है अपने मन की करना चाहता है, जो बहुए नई आती है वो संयुक्त परिवार में नही रहना चाहती है और अपनी स्वतंत्रता चाहती है वो उस कायदे कानून को नही मानना चाहती है जो कि एक सयुक्त परिवार में होते है। पर इसके अनेक दुष्प्रभाव भी समाज के लोगो पर पड़े है क्यो की सयुक्त परिवार में सबसे पहले मानसिक शांति रहती है जिससे व्यक्ति स्वयं को अकेला महसूस नहीं करता चाहे उस पर कितनी भी बड़ी विपदा क्यो नही आ जाये, दूसरा की संयुक्त परिवार में जिम्मेदारियों को सयुक्त रूप से अलग अलग दिया जाता है इस कारण व्यक्ति पर जिम्मेदारियों का बोझ अकेले पर नही आता।

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